भारत की राष्ट्रपति नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं

प्राचीनकाल में नालंदा में विविध विचारधाराओं का स्वागत किया जाता था और वाद-विवाद एवं संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता था: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ने में नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन : 31.03.2026

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज 31 मार्च, 2026 को राजगीर, बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं और समारोह को संबोधित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह सभ्यता के उस वादे की पुष्टि करता है जो कहता है कि: ज्ञान कायम रहे, संवाद की विशिष्टता बनी रहे और शिक्षा मानवता की सेवा करती रहे। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, अनुशासन और बौद्धिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज स्नातक होने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक 30 से अधिक देशों के अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय लगभग आठ शताब्दियों तक ज्ञान के एक महान केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित रहा। नालंदा का पतन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी। फिर भी, नालंदा की अवधारणा जीवंत बनी रही। हमारे समय में इसका पुनरुत्थान उस गौरवशाली विरासत को आधुनिक परिवेश में पुनःस्थापित करने के प्रति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह पुनरुत्थान दूरदर्शी नेतृत्व, सतत संस्थागत प्रयासों और सहयोगी देशों के समन्वय से संभव हो पाया है। यह इस बात का उदाहरण है कि साझा मूल्यों के आलोक में विभिन्न राष्ट्र बड़े लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीनकाल में नालंदा ने विविध विचारधाराओं का स्वागत किया और वाद-विवाद और संवाद की संस्कृति को प्रोत्साहित किया। यहां ज्ञान को कभी भी अलग करके नहीं देखा गया; इसे नैतिकता, समाज और मानवता के व्यापक कल्याण से जोड़ा गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारा यह आदर्श आज भी अत्यंत प्रासंगिक बना हुआ है। आज जब विश्व अनेक जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब करुणा पर आधारित स्वतंत्र और विवेचनापूर्ण चिंतन की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नालंदा विश्वविद्यालय एशिया और विश्व में एक अग्रणी शिक्षण संस्थान के रूप में उभरेगा। यह न केवल अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता बल्कि अपने मूल्यों के लिए भी विशिष्ट पहचान बनाएगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का बौद्ध दर्शन और परंपरा से गहरा और जीवंत संबंध है। इस संबंध को गंभीरता से और भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपराओं की व्यापक समझ के साथ सिंचित किया जाना चाहिए। बौद्ध विद्वत्ता को पूरे एशिया में इसकी विविध अभिव्यक्तियों से तालमेल बनाते समय भारत की सभ्यतागत नींव से भी जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध अध्ययन के अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय से इस क्षेत्र में दृढ़ संकल्प, गहराई और खुले मन से जुटने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करके नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर वही पुरानी भूमिका निभा सकता है जो वह सदियों पूर्व निभाता था।

राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपियों का संग्रह था। उस ऊंचे मापदंड को आधार मानते हुए, आज हम यहां जो कार्य करेंगे वही हमारी चिरस्थायी धरोहर बनेंगे। भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ने में नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

समाचार पत्रिका के लिए सदस्यता लें

सदस्यता का प्रकार
वह न्यूज़लेटर चुनें जिसकी आप सदस्यता लेना चाहते हैं।
सब्सक्राइबर का ईमेल पता